UPSC समसामयिक घटनाएँ 11 जनवरी 2026 | UPSC Current Affairs in Hindi 11 January 2026


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GS–3: अर्थव्यवस्था एवं विज्ञान–प्रौद्योगिकी | UPSC Current Affairs in Hindi 11 January 2026


NSE IPO और SEBI की निगरानी: भारत के पूंजी बाजार में अनुपालन को सुदृढ़ करना

समाचार में क्यों?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को संभावित स्वीकृति, लंबे समय से चले आ रहे नियामक विवादों के समाधान का संकेत देती है तथा भारतीय पूंजी बाजार में अनुपालन सुधारों पर नए सिरे से ध्यान को दर्शाती है।

NSE IPO और SEBI की निगरानी | UPSC Current Affairs in Hindi 11 January 2026
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मुख्य बिंदु

  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की स्थापना 1992 में एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य प्रतिभूति बाजार का विनियमन, निवेशकों के हितों की रक्षा तथा बाजार के विकास को बढ़ावा देना है।
  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जो इक्विटी, ऋण और डेरिवेटिव बाजारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • NSE का IPO कई वर्षों से लंबित था, जिसका प्रमुख कारण कॉरपोरेट गवर्नेंस में चूक और को-लोकेशन घोटाले जैसे मुद्दों पर नियामक जांच रही।
  • को-लोकेशन घोटाले में कुछ ब्रोकरों को NSE की ट्रेडिंग प्रणालियों तक अनुचित पहुंच दिए जाने के आरोप लगे, जिसके परिणामस्वरूप SEBI और अन्य एजेंसियों द्वारा जांच की गई।
  • SEBI ने पूर्व में NSE और उसके पूर्व अधिकारियों पर कॉरपोरेट गवर्नेंस एवं नियामक अनुपालन से जुड़े उल्लंघनों के लिए भारी दंड लगाए थे।
  • संभावित स्वीकृति यह दर्शाती है कि NSE द्वारा अपनाए गए व्यापक अनुपालन और गवर्नेंस सुधारों—जैसे आंतरिक नियंत्रण, बोर्ड निगरानी और जवाबदेही तंत्र को मजबूत करना—से SEBI संतुष्ट है।
  • यह विकास निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने, बाजार की अखंडता बनाए रखने और भारत में बाजार अवसंरचना संस्थानों (MII) पर मजबूत नियामक निगरानी का उदाहरण स्थापित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • इस प्रकार के उच्च-प्रोफ़ाइल नियामक मामलों का समाधान, निष्पक्ष, पारदर्शी और कुशल पूंजी बाजार प्रणाली सुनिश्चित करने की SEBI की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

प्रारंभिक परीक्षा (MCQ)

SEBI के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. इसे 1988 में एक वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया था तथा 1992 में अध्यादेश के माध्यम से इसकी शक्तियों का विस्तार किया गया।
  2. इसके नियामक क्षेत्राधिकार में स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, म्यूचुअल फंड और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां शामिल हैं।
  3. यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) 1 और 2 केवल
(b) 2 और 3 केवल
(c) 1 और 3 केवल
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

व्याख्या:
कथन 1 सही है। SEBI की स्थापना 1988 में गैर-वैधानिक निकाय के रूप में हुई थी और 1992 में अध्यादेश के माध्यम से इसे वैधानिक शक्तियां प्रदान की गईं, जिसे बाद में SEBI अधिनियम, 1992 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
कथन 2 सही है। SEBI स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, म्यूचुअल फंड, ब्रोकर और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों सहित कई मध्यस्थों को विनियमित करता है।
कथन 3 गलत है। SEBI एक स्वायत्त निकाय है और दैनिक कार्यों में वित्त मंत्रालय के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं होता।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

बाजार अवसंरचना संस्थानों (MII) जैसे स्टॉक एक्सचेंजों में सुशासन और अनुपालन सुनिश्चित करने में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। बाजार की अखंडता बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए तथा इसकी निगरानी क्षमता को और मजबूत करने के उपाय सुझाइए।


NITI आयोग की R ब्लूप्रिंट: नवाचार को राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ना

समाचार में क्यों?

नीति आयोग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अनुसंधान एवं विकास (R) परिणामों को संरेखित करने हेतु एक राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता पर बल दे रहा है।

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9 Pillars of Digital India | NITI आयोग की R ब्लूप्रिंट

मुख्य बिंदु

  • नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख नीति-निर्माण थिंक टैंक है, जो अनुसंधान एवं विकास को व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों से जोड़ने पर केंद्रित है।
  • यह रणनीति आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में भारत की रणनीतिक चुनौतियों का समाधान करने का लक्ष्य रखती है।
  • अकादमिक संस्थानों, उद्योग, सरकारी अनुसंधान संगठनों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।
  • सार्वजनिक और निजी R निधियों के कुशल आवंटन तथा अनुसंधान के व्यावसायीकरण की व्यवस्था शामिल है।
  • इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।

रणनीति का उद्देश्य

भारत का R&D व्यय लगभग GDP का 0.7% है, जो वैश्विक औसत से कम है। नई रणनीति का लक्ष्य:

  • अनुसंधान को राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान से जोड़ना
  • तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाना
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ करना

प्राथमिकता क्षेत्र

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
  • क्वांटम कंप्यूटिंग
  • जैव प्रौद्योगिकी
  • रक्षा एवं अंतरिक्ष
  • नवीकरणीय ऊर्जा

चुनौतियाँ

  • अनुसंधान का विखंडन
  • निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी
  • प्रयोगशाला से बाजार तक की दूरी

UPSC प्रासंगिकता

  • GS-2: नीति निर्माण
  • GS-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

मुख्य परीक्षा प्रश्न

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप अनुसंधान एवं विकास को संरेखित करने हेतु नीति आयोग की पहल का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।


जनकल्याण हेतु प्रौद्योगिकी: R और नवाचार के माध्यम से कल्याण

अवधारणा

जनकल्याण हेतु प्रौद्योगिकी का अर्थ है वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल नवाचारों का उपयोग कर नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार।

क्षेत्रवार उपयोग

क्षेत्रउदाहरण
स्वास्थ्यeSanjeevani, AI डायग्नोस्टिक्स
शिक्षाSWAYAM, DIKSHA
कृषिe-NAM, ड्रोन आधारित खेती
शासनआधार, UPI, DBT

लाभ

  • पारदर्शिता
  • लागत में कमी
  • समावेशी विकास

चुनौतियाँ

  • डिजिटल डिवाइड
  • डेटा गोपनीयता
  • कुशल मानव संसाधन की कमी

मुख्य बिंदु

  • स्वास्थ्य: ई-संजीवनी, AI आधारित निदान
  • शिक्षा: SWAYAM, DIKSHA
  • कृषि: ई-नाम, ड्रोन आधारित खेती
  • शासन: आधार, UPI, DBT
  • आपदा प्रबंधन: AI आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ

चुनौतियाँ

डिजिटल डिवाइड, डेटा गोपनीयता, नैतिक प्रश्न, कम R निवेश।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

भारत में समावेशी जनकल्याण हेतु प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार की संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।


GS–2: अंतरराष्ट्रीय संबंध | UPSC Current Affairs in Hindi 11 January 2026

भारत–जर्मनी संबंध: रणनीतिक साझेदारी का विस्तार

मुख्य बिंदु

  • 2000 में रणनीतिक साझेदारी
  • EU में जर्मनी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
  • GSDP (2022) – €10 बिलियन सहयोग
  • G4 के अंतर्गत UNSC सुधार समर्थन
भारत–जर्मनी संबंध
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सहयोग के प्रमुख स्तंभ

  • आर्थिक: जर्मनी, EU में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
  • जलवायु: ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप
  • बहुपक्षीय: G4 के माध्यम से UNSC सुधार

महत्व

यह साझेदारी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में सहायक है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

भारत–जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की प्रमुख विशेषताओं और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।


GS–1: कला, संस्कृति एवं विरासत | | UPSC Current Affairs in Hindi 11 January 2026

सोमनाथ मंदिर: सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ऐतिहासिक दृढ़ता

समाचार में क्यों?

प्रधानमंत्री की स्वाभिमान पर्व यात्रा ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को उजागर किया।

सोमनाथ मंदिर
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ऐतिहासिक महत्व

  • 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम
  • बार-बार विध्वंस और पुनर्निर्माण
  • स्वतंत्रता पश्चात पुनर्निर्माण – सरदार पटेल के प्रयास

मुख्य बिंदु

  • 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम
  • 1024 ई. में महमूद ग़ज़नवी द्वारा विध्वंस
  • स्वतंत्रता पश्चात सरदार पटेल द्वारा पुनर्निर्माण
  • 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा

आधुनिक संदर्भ

आयामभूमिका
राष्ट्रीय पहचानसांस्कृतिक गौरव
पर्यटनस्थानीय विकास
विरासत संरक्षणपीढ़ियों तक निरंतरता

मुख्य परीक्षा प्रश्न

सोमनाथ मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों की राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक पर्यटन में भूमिका का विश्लेषण कीजिए।


FAQs – UPSC समसामयिक घटनाएँ (11 जनवरी 2026)

प्र.1. NSE IPO क्यों महत्वपूर्ण है?
➡️ यह नियामक सुधार और निवेशक विश्वास को दर्शाता है।

प्र.2. नीति आयोग की R रणनीति का लक्ष्य क्या है?
➡️ अनुसंधान को राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़ना।

प्र.3. DPI क्या है?
➡️ आधार, UPI जैसी डिजिटल शासन प्रणालियाँ।

प्र.4. MII क्यों महत्वपूर्ण हैं?
➡️ वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए।

प्र.5. GSDP क्या है?
➡️ भारत–जर्मनी का हरित विकास सहयोग।

प्र.6. सोमनाथ मंदिर का प्रतीकात्मक महत्व क्या है?
➡️ भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता।


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Devendra Upadhyay - UPSC Mentor & Founder, Soham IAS
Devendra Upadhyay
UPSC Mentor & Founder, Soham IAS at  | वेबसाइट |  + posts

Devendra Upadhyay is a UPSC mentor and the founder of Soham IAS. With years of experience guiding civil services aspirants, he specialises in helping working professionals and first-generation learners build structured, self-directed preparation strategies. His PACE Method framework — Plan, Absorb, Consolidate, Execute — has helped hundreds of aspirants bring clarity and consistency to their UPSC journey. He offers limited 1-on-1 mentorship sessions through Soham IAS.

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