UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026 | 131वाँ संविधान संशोधन, आयकर अधिनियम 2025, कोर सेक्टर और भारत की विदेश नीति
आज के UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026 में चार प्रमुख विषय केंद्र में हैं: संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक 2026 की संसद में हार, आयकर अधिनियम 2025 का लागू होना, मार्च 2026 में कोर सेक्टर में संकुचन, और कोरिया, अफ्रीका, अमेरिका तथा पश्चिम एशिया में भारत की सक्रिय बहु-आयामी विदेश नीति। ये सभी विषय GS पेपर 2 (राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2026 की तैयारी कर रहे सभी अभ्यर्थियों के लिए यह नोट्स अनिवार्य अध्ययन सामग्री है।
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📰 आज की प्रमुख खबरें — एक नजर में | UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026
- 🏛️ संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक 2026 संसद में पराजित
- 💰 आयकर अधिनियम 2025 ने 1961 के अधिनियम की जगह ली — 1 अप्रैल 2026 से लागू
- 📉 मार्च 2026 में कोर सेक्टर में 0.4% की गिरावट — 2 वर्षों में सबसे कमज़ोर प्रदर्शन
- 🌍 भारत-ROK संयुक्त रणनीतिक दृष्टि, IAFS-IV, भारत-US BTA वार्ता सक्रिय
📌 कहानी 1: संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक 2026 — संसद में पराजय | UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026
पृष्ठभूमि और क्या हुआ
106वाँ संविधान संशोधन (महिला आरक्षण अधिनियम, 2023) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गई थीं। परंतु इसे लागू करने की शर्त थी — अगली परिसीमन प्रक्रिया और नई जनगणना का पूरा होना। इस अनिवार्य शर्त को हटाने के लिए सरकार ने संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक 2026 प्रस्तुत किया, जो संसद में पराजित हो गया। यह 2026 की सबसे बड़ी संवैधानिक और राजनीतिक घटनाओं में से एक बन गई है।
इस पराजय के बाद तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई। सत्तापक्ष ने क्षेत्रीय दलों पर आरोप लगाया जबकि विपक्ष ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताया। दक्षिण भारत के राज्यों की मुख्य आपत्ति यह है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से उनकी लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी — यह उत्तर-दक्षिण राजनीतिक विभाजन की मूल जड़ है।
📊 प्रीलिम्स तथ्य अध्ययन तालिका — संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक 2026
| पैरामीटर | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| मूल अधिनियम | 106वाँ संविधान संशोधन (महिला आरक्षण अधिनियम, 2023) |
| आरक्षण का प्रावधान | लोकसभा + राज्य विधानसभाओं में 1/3 सीटें महिलाओं को |
| संबंधित अनुच्छेद | अनुच्छेद 330A, 332A (106वें संशोधन द्वारा सम्मिलित) |
| लागू होने की शर्त | जनगणना के बाद परिसीमन |
| 131वाँ संशोधन का उद्देश्य | महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करना |
| वर्तमान संसदीय स्थिति | अप्रैल 2026 में राज्यसभा में पराजित |
| आवश्यक बहुमत | अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत — उपस्थित सदस्यों का 2/3 + कुल सदस्यता का बहुमत |
| अन्य संबंधित अनुच्छेद | अनुच्छेद 81 (लोकसभा संरचना), 82 (परिसीमन), 170 (राज्य विधानमंडल) |
| दक्षिण भारत की चिंता | जनसंख्या-आधारित परिसीमन से सीटें घट सकती हैं |
| IPU रैंकिंग | संसद में महिलाओं की भागीदारी में भारत 148वें स्थान पर |
🔍 मेन्स कोण — GS पेपर 2 (राजव्यवस्था, शासन)
कोण 1 — संघवाद बनाम केंद्र: परिसीमन विवाद भारतीय संघवाद में एक गहरे संरचनात्मक तनाव को उजागर करता है। जनसंख्या नियंत्रण में अग्रणी रहे दक्षिणी राज्य अब संसदीय प्रतिनिधित्व में पीछे जाने की आशंका से चिंतित हैं। यह एक मूलभूत प्रश्न उठाता है: क्या लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व केवल जनसंख्या पर आधारित होना चाहिए, या विकासात्मक उपलब्धियों को भी पुरस्कृत किया जाना चाहिए?
कोण 2 — महिला राजनीतिक सशक्तीकरण: IPU महिला संसद सूचकांक में भारत 148वें स्थान पर है — अपने लोकतांत्रिक समकक्षों से बहुत पीछे। महिला आरक्षण के क्रियान्वयन में यह देरी राजनीतिक इच्छाशक्ति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और यह सिद्ध करती है कि संवैधानिक प्रावधान अकेले पर्याप्त नहीं हैं।
कोण 3 — संसदीय प्रक्रिया और गठबंधन राजनीति: संविधान संशोधन के लिए अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत आवश्यक है। विधेयक की पराजय गठबंधन की जटिल राजनीति का परिणाम है — यह संवैधानिक सुधार में क्षेत्रीय दलों की वीटो शक्ति को दर्शाती है।
📝 संभावित मेन्स प्रश्न (GS पेपर 2)
“संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक 2026 की पराजय भारतीय संघवाद की गहरी संरचनात्मक दरारों को प्रतिबिंबित करती है। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।”
उत्तर संरचना (250 शब्द रूपरेखा):
- प्रस्तावना: 106वाँ संशोधन, उसकी शर्तें, और 131वाँ संशोधन का उद्देश्य।
- मुख्य अनुच्छेद 1: परिसीमन की दुविधा — दक्षिण भारत का जनसांख्यिकीय लाभ राजनीतिक दायित्व बनता है।
- मुख्य अनुच्छेद 2: संवैधानिक तंत्र — अनुच्छेद 82, जनगणना की अनिवार्यता, अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत।
- मुख्य अनुच्छेद 3: महिला सशक्तीकरण — वैश्विक रैंकिंग, नीतिगत आवश्यकता।
- मुख्य अनुच्छेद 4: गठबंधन राजनीति — क्षेत्रीय दल और संवैधानिक सुधार में बाधा।
- निष्कर्ष: उच्च-प्रदर्शन वाले राज्यों के लिए आनुपातिक सुधार तंत्र जैसे समाधान सुझाएं।
📌 कहानी 2: आयकर अधिनियम 2025 — 1 अप्रैल 2026 से लागू | UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026
पृष्ठभूमि और क्या बदला
सरकार ने वित्त अधिनियम 2026 अधिसूचित कर आयकर अधिनियम 2025 को लागू कर दिया है, जिसने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह ली है। यह भारतीय कर इतिहास के सबसे बड़े विधायी सुधारों में से एक है। नए कानून में 800 से अधिक धाराओं को घटाकर लगभग 536 धाराएं की गई हैं, पुरानी और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाया गया है, एकल ‘कर वर्ष’ (Tax Year) की अवधारणा लाई गई है और विवाद समाधान को सरल बनाया गया है। आधिकारिक अधिसूचना PIB वेबसाइट पर उपलब्ध है।
यह सुधार “कर आतंकवाद” की चिंताओं को संबोधित करता है और व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) में सुधार का संकेत देता है। CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) के तहत संचालित यह कानून भारत को $10 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
📊 प्रीलिम्स तथ्य अध्ययन तालिका — आयकर अधिनियम 2025
| पैरामीटर | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| प्रतिस्थापित अधिनियम | आयकर अधिनियम, 1961 |
| प्रभावी तिथि | 1 अप्रैल 2026 |
| प्रमुख परिवर्तन | “पूर्व वर्ष” + “निर्धारण वर्ष” मिलाकर एकल कर वर्ष (Tax Year) बनाया |
| सरलीकरण | ~800 धाराएं घटकर ~536 धाराएं |
| नई विशेषता | फेसलेस असेसमेंट संहिताबद्ध; विवाद समाधान सुदृढ़ |
| शासी निकाय | CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) |
| संबंधित मंत्रालय | वित्त मंत्रालय |
| भारत का कर-जीडीपी अनुपात | ~11% (OECD मानक ~34% की तुलना में) |
| नीतिगत संरेखण | Ease of Doing Business, $10 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था विज़न |
| सक्षम अधिनियम | वित्त अधिनियम 2026, मार्च 2026 में अधिसूचित |
🔍 मेन्स कोण — GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था)
कोण 1 — कर सरलीकरण और अनुपालन: 65 वर्ष पुराने कानून से सरल संहिता में परिवर्तन व्यवसायों और व्यक्तियों दोनों के लिए अनुपालन लागत को कम करता है। कम धाराओं का अर्थ है कम विवाद, कम मुकदमेबाजी और करदाता-प्रशासन के बीच अधिक विश्वास।
कोण 2 — प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कर संतुलन: भारत का कर-जीडीपी अनुपात (~11%) OECD मानकों (~34%) की तुलना में बहुत कम है। नया अधिनियम स्पष्ट संहिताकरण के माध्यम से प्रत्यक्ष कर आधार को व्यापक बनाने और कर चोरी को कम करने का लक्ष्य रखता है।
कोण 3 — सहकारी संघवाद: यद्यपि यह केंद्रीय कानून है, लेकिन वित्त आयोग के तहत आयकर का हस्तांतरण राज्यों के संसाधनों को सीधे प्रभावित करता है। बेहतर कर संग्रह का अर्थ है बड़ा विभाज्य पूल — जिससे कर प्रशासन सुधार संघवाद का भी मुद्दा बन जाता है।
📝 संभावित मेन्स प्रश्न (GS पेपर 3)
“भारत का नया आयकर अधिनियम 2025 प्रत्यक्ष कर प्रशासन में एक आदर्श बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। राजस्व संग्रहण, करदाता अधिकारों और भारत की विकास महत्वाकांक्षाओं के लिए इसके महत्व की परीक्षा कीजिए।”
उत्तर संरचना (250 शब्द रूपरेखा):
- प्रस्तावना: 1961 अधिनियम को बदलने का संदर्भ; प्रमुख विधायी उद्देश्य।
- मुख्य अनुच्छेद 1: सरलीकरण और अनुपालन लाभ — कम मुकदमेबाजी, फेसलेस असेसमेंट, स्पष्टता।
- मुख्य अनुच्छेद 2: राजस्व निहितार्थ — कर आधार विस्तार, चोरी में कमी।
- मुख्य अनुच्छेद 3: करदाता अधिकार और शिकायत निवारण तंत्र।
- मुख्य अनुच्छेद 4: सीमाएं — कार्यान्वयन चुनौतियाँ, डिजिटल विभाजन, असंगठित क्षेत्र।
- निष्कर्ष: प्रभावी कर सुधार के लिए कानून और प्रशासनिक क्षमता दोनों का विकास अनिवार्य।
📌 कहानी 3: मार्च 2026 में कोर सेक्टर में 0.4% की गिरावट | UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026
पृष्ठभूमि और महत्व
भारत के आठ कोर सेक्टर उद्योगों — कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली — में मार्च 2026 में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई, जो दो वर्षों में सबसे कमज़ोर प्रदर्शन है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि कोर सेक्टर का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27% भार होता है, जो इसे भारत के औद्योगिक स्वास्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण अग्रणी संकेतक बनाता है।
साथ ही, फिच (BMI) और ICRA जैसी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव का हवाला देते हुए FY27 के लिए भारत के GDP विकास अनुमान को नीचे संशोधित किया है।
📊 प्रीलिम्स तथ्य अध्ययन तालिका — कोर सेक्टर और भारतीय अर्थव्यवस्था
| पैरामीटर | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| कोर सेक्टर में गिरावट | मार्च 2026 में -0.4% |
| IIP में कोर सेक्टर का भार | 40.27% |
| आठ कोर उद्योग | कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट, बिजली |
| भारत की GDP वृद्धि (विश्व बैंक FY26) | ~6.5% (सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था) |
| ICRA GDP अनुमान FY27 | 6.5% (पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण संशोधित) |
| फिच (BMI) संशोधन | नीचे की ओर — पश्चिम एशिया अस्थिरता और ऊर्जा व्यवधान का हवाला |
| संकुचन का प्राथमिक कारण | पश्चिम एशिया संघर्ष से तेल आपूर्ति श्रृंखला बाधित; माल ढुलाई लागत बढ़ी |
| राजकोषीय जोखिम | धीमी औद्योगिक वृद्धि → कम GST संग्रह → केंद्र + राज्य वित्त पर असर |
| आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 थीम | भारत उच्च-विकास पथ की ओर संक्रमण कर रहा है |
| भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता | कच्चे तेल की आवश्यकता का 85% से अधिक आयात |
🔍 मेन्स कोण — GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था)
कोण 1 — औद्योगिक मंदी के संकेतक: IIP डेटा से पहले कोर सेक्टर का संकुचन यह संकेत देता है कि औद्योगिक सुधार अभी भी नाजुक है। कच्चा तेल और सीमेंट में दबाव निर्माण और बुनियादी ढांचे के निवेश चक्र से सीधे जुड़ा है।
कोण 2 — बाह्य दबाव और ऊर्जा भेद्यता: पश्चिम एशिया संघर्ष (ईरान युद्ध) ने तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया है और भारत के आयात बिल को बढ़ाया है। भारत अपनी कच्चे तेल की 85% से अधिक आवश्यकता आयात से पूरी करता है, जिससे ऊर्जा मूल्य अस्थिरता एक व्यापक आर्थिक भेद्यता बन जाती है।
कोण 3 — राजकोषीय निहितार्थ: यदि औद्योगिक गति धीमी होती है, तो GST संग्रह घट सकता है, जो केंद्र और राज्य दोनों के राजकोषीय गणित को प्रभावित करेगा। सरकार को पूंजीगत व्यय-संचालित मांग प्रोत्साहन और राजकोषीय समेकन के बीच संतुलन बनाना होगा।
📝 संभावित मेन्स प्रश्न (GS पेपर 3)
“बाहरी भू-राजनीतिक दबावों के बीच मार्च 2026 में भारत के कोर सेक्टर का संकुचन भारत की विकास गाथा की मजबूती पर प्रश्नचिह्न लगाता है। समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।”
उत्तर संरचना (250 शब्द रूपरेखा):
- प्रस्तावना: कोर सेक्टर परिभाषा, IIP में 40.27% भार, और संकुचन का आंकड़ा।
- मुख्य अनुच्छेद 1: क्षेत्रवार विश्लेषण — कौन से उद्योग संकुचित हुए और क्यों।
- मुख्य अनुच्छेद 2: बाह्य झटके — पश्चिम एशिया संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान।
- मुख्य अनुच्छेद 3: भारत की संरचनात्मक शक्तियाँ — सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था।
- मुख्य अनुच्छेद 4: नीतिगत विकल्प — पूंजीगत व्यय, PLI विविधीकरण, ऊर्जा संक्रमण।
- निष्कर्ष: ऊर्जा आयात निर्भरता से मुक्ति — ऊर्जा संक्रमण जलवायु और आर्थिक सुरक्षा दोनों का अनिवार्य हिस्सा।
📌 कहानी 4: भारत की विदेश नीति — अप्रैल 2026 में बहु-आयामी सक्रियता | UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026
भारत-दक्षिण कोरिया: संयुक्त रणनीतिक दृष्टि 2026–2030
भारत और दक्षिण कोरिया ने विशेष रणनीतिक साझेदारी को गहरा करते हुए एक संयुक्त रणनीतिक दृष्टि दस्तावेज 2026–2030 जारी किया, जो हिंद-प्रशांत सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक सहयोग, सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखलाओं और आतंकवाद-विरोधी को कवर करता है। आधिकारिक दस्तावेज के लिए देखें PIB — भारत-ROK संयुक्त रणनीतिक दृष्टि 2026।
भारत-अफ्रीका: इंडिया-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन IV की ओर
22 अप्रैल को EAM एस. जयशंकर ने कहा: “अफ्रीका भारत की विदेश नीति के केंद्र में है।” इंडिया-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन IV (IAFS-IV) को दक्षिण-दक्षिण सहयोग के अगले बड़े चरण के रूप में स्थापित किया जा रहा है — प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण, फार्मा, कृषि और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) सहित। भारत की UPI-मॉडल DPI निर्यात और जेनेरिक फार्मास्यूटिकल प्रतिस्पर्धात्मकता इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है।
भारत-अमेरिका: BTA वार्ता और PAX Silica
भारत और अमेरिका सक्रिय द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) वार्ता में लगे हैं। PAX Silica ढांचे के तहत महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर्स पर नए सहयोग की घोषणा की गई है। ट्रम्प-युग के टैरिफ की छाया भारत की निर्यात रणनीति को आकार दे रही है।
📊 प्रीलिम्स तथ्य अध्ययन तालिका — भारत की विदेश नीति अप्रैल 2026
| साझेदारी | प्रमुख विकास | तिथि/स्रोत |
|---|---|---|
| भारत-दक्षिण कोरिया | संयुक्त रणनीतिक दृष्टि 2026–30; विशेष रणनीतिक साझेदारी गहरी | PIB, 20 अप्रैल 2026 |
| भारत-अफ्रीका | IAFS-IV पाइपलाइन में; “अफ्रीका विदेश नीति के केंद्र में” — EAM जयशंकर | 22 अप्रैल 2026 |
| भारत-अमेरिका | BTA वार्ता; PAX Silica सहयोग (महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर) | ET, 9 अप्रैल 2026 |
| भारत-यूरोप/जर्मनी | EU में राजनयिक पहल; रक्षा मंत्री का जर्मनी दौरा; 75 वर्ष के संबंध | PIB, 25 अप्रैल 2026 |
| भारत-पश्चिम एशिया | IGoM ने स्थिति की समीक्षा; ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी सुरक्षा आकलन | PIB, 16 अप्रैल 2026 |
| भारत-EU FTA | उन्नत वार्ता चरण; वैश्विक GDP का संभावित 25% कवरेज | द हिंदू, जनवरी 2026 |
| NITI Aayog | 25 अप्रैल 2026 को पुनर्गठित; प्रभावी शहर शासन रिपोर्ट जारी | PIB, 25 अप्रैल 2026 |
| PAX Silica | भारत-अमेरिका सहयोग ढांचा — महत्वपूर्ण खनिज और सेमीकंडक्टर | अप्रैल 2026 |
🔍 मेन्स कोण — GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
कोण 1 — बहु-संरेखण एक रणनीतिक सिद्धांत के रूप में: अमेरिका (PAX Silica, BTA), दक्षिण कोरिया (हिंद-प्रशांत), अफ्रीका (दक्षिण-दक्षिण) और EU (FTA) के साथ एक साथ जुड़ाव रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण का पाठ्यपुस्तकीय प्रदर्शन है। शीत युद्ध के गुटनिरपेक्षता के विपरीत, भारत का वर्तमान दृष्टिकोण सक्रिय और हित-संचालित है।
कोण 2 — भारत-अफ्रीका और वैश्विक दक्षिण नेतृत्व: वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करने की भारत की महत्वाकांक्षा में अफ्रीका महत्वपूर्ण है — 54 राष्ट्र, UNGA में महत्वपूर्ण मत, विशाल प्राकृतिक संसाधन और युवा बाज़ार। भारत की DPI और जेनेरिक फार्मास्यूटिकल प्रतिस्पर्धात्मकता वे क्षेत्र हैं जहाँ चीन प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता।
कोण 3 — पश्चिम एशिया की दुविधा और रणनीतिक स्वायत्तता की सीमाएं: ईरान-खाड़ी गतिशीलता में भारत की दुविधा — ईरान से कच्चे तेल के आयात, $100+ बिलियन के प्रेषण, रणनीतिक शिपिंग लेन, और खाड़ी देशों में रहने वाले 90 लाख से अधिक भारतीयों की सुरक्षा — “रणनीतिक स्वायत्तता” की वास्तविक सीमाओं की परीक्षा करती है।
📝 संभावित मेन्स प्रश्न (GS पेपर 2)
“2026 में भारत की विदेश नीति प्रतिक्रियाशील कूटनीति से सक्रिय बहु-आयामी जुड़ाव की ओर सचेत बदलाव को दर्शाती है। हालिया उदाहरणों के साथ पुष्टि कीजिए।”
उत्तर संरचना (250 शब्द रूपरेखा):
- प्रस्तावना: बहु-संरेखण/रणनीतिक स्वायत्तता परिभाषित करें; शीत युद्ध के गुटनिरपेक्षता से अंतर।
- मुख्य अनुच्छेद 1: हिंद-प्रशांत सुरक्षा — भारत-ROK संयुक्त दृष्टि, Quad गतिशीलता।
- मुख्य अनुच्छेद 2: वैश्विक दक्षिण नेतृत्व — IAFS, G20 विरासत, ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन।
- मुख्य अनुच्छेद 3: आर्थिक कूटनीति — US व्यापार वार्ता, EU FTA, महत्वपूर्ण खनिज रणनीति।
- मुख्य अनुच्छेद 4: चुनौतियां — पश्चिम एशिया दुविधा, अफ्रीका में चीन का बढ़ता प्रभाव।
- निष्कर्ष: बहु-आयामी दृष्टिकोण रणनीतिक संपत्ति है; राजनयिक क्षमता और आर्थिक शक्ति एक साथ बढ़नी चाहिए।
⚡ त्वरित प्रीलिम्स पुनरावृत्ति — UPSC करंट अफेयर्स 27 अप्रैल 2026
- ✅ 106वाँ संशोधन = महिलाओं के लिए 1/3 सीटें; जनगणना के बाद परिसीमन होने पर ही लागू
- ✅ 131वाँ संशोधन विधेयक 2026 = राज्यसभा में पराजित; महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करना था लक्ष्य
- ✅ आयकर अधिनियम 2025 = 1961 अधिनियम की जगह; एकल “कर वर्ष” अवधारणा 1 अप्रैल 2026 से
- ✅ IIP में कोर सेक्टर का भार = 40.27%; मार्च 2026 में -0.4% संकुचन
- ✅ भारत-ROK संयुक्त रणनीतिक दृष्टि 2026–30 = रक्षा, हिंद-प्रशांत, सेमीकंडक्टर
- ✅ IAFS-IV = अफ्रीका “भारत की विदेश नीति के केंद्र में”
- ✅ PAX Silica = महत्वपूर्ण खनिजों/सेमीकंडक्टर पर भारत-अमेरिका सहयोग ढांचा
- ✅ NITI Aayog पुनर
UPSC हेतु अनुशंसित स्रोत –
- UPSC की आधिकारिक वेबसाइट- https://upsc.gov.in/
- The Hindu समाचार पत्र – https://www.thehindu.com/
- PIB की आधिकारिक वेबसाइट – https://pib.gov.in/
- सोहम IAS का आधिकारिक यू ट्यूब चैनल (100% निशुल्क) – https://www.youtube.com/@Soham-IAS

Devendra Upadhyay
Devendra Upadhyay is a UPSC mentor and the founder of Soham IAS. With years of experience guiding civil services aspirants, he specialises in helping working professionals and first-generation learners build structured, self-directed preparation strategies. His PACE Method framework — Plan, Absorb, Consolidate, Execute — has helped hundreds of aspirants bring clarity and consistency to their UPSC journey. He offers limited 1-on-1 mentorship sessions through Soham IAS.







