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GS-2 – UPSC करेंट अफेयर्स 7 जनवरी 2026

🏛️ लोकतंत्र को सशक्त बनाना: भारत की विधायी प्रक्रिया में जन परामर्श की भूमिका | UPSC करेंट अफेयर्स 7 जनवरी 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-2: शासन, संविधान, राजनीति, पारदर्शिता और जवाबदेही।
समाचार में क्यों:
भारत सरकार ने हाल ही में कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित कीं। यह कदम भागीदारी आधारित शासन (Participatory Governance) को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु:
- परिभाषा:
विधायी प्रक्रिया में जन परामर्श का अर्थ है – नागरिकों, विशेषज्ञों और हितधारकों से प्रस्तावित विधेयकों या नीतियों पर सुझाव आमंत्रित करना। - पूर्व-विधायी परामर्श नीति (Pre-Legislative Consultation Policy – PLCP), 2014:
सरकार ने यह नीति बनाई ताकि सभी मंत्रालय अपने मसौदा विधेयकों को कम से कम 30 दिनों के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखें। - मुख्य उद्देश्य:
- नीति-निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
- नागरिकों को नीति-निर्माण में भागीदारी का अवसर देना।
- विविध दृष्टिकोणों को शामिल करना।
- बेहतर और प्रभावी कानून बनाना।
- प्रक्रिया:
मंत्रालय अपनी वेबसाइट पर मसौदा विधेयक डालते हैं और ईमेल या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुझाव लेते हैं। - लाभ:
- नागरिकों में स्वामित्व और विश्वास की भावना बढ़ती है।
- नीति निर्माण की गुणवत्ता सुधरती है।
- कार्यान्वयन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं।
- चुनौतियां:
- कम समय सीमा और तकनीकी भाषा।
- कम भागीदारी दर।
- सरकार द्वारा सुझावों पर प्रतिक्रिया की पारदर्शिता का अभाव।
- सुझावों का कानूनी रूप से बाध्यकारी न होना।
- कीटनाशक प्रबंधन विधेयक से संबंध:
इस विधेयक पर जन परामर्श प्रक्रिया, पर्यावरणीय और कृषि नीति निर्माण में जन भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न (Prelims MCQ):
निम्नलिखित में से कौन-से कथन भारत की विधायी प्रक्रिया में जन परामर्श से संबंधित हैं?
- PLCP के तहत सभी मंत्रालयों को अपने विधेयक 30 दिन के लिए सार्वजनिक करना अनिवार्य है।
- जन परामर्श से मिले सुझाव सरकार पर बाध्यकारी होते हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाना है।
उत्तर: (c) 1 और 3 केवल
मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains):
भारत में जन परामर्श प्रक्रिया की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक विश्लेषण करें और इसे अधिक सशक्त बनाने हेतु सुझाव दें।
GS-3 – UPSC करेंट अफेयर्स 07 जनवरी 2026
🌾 कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025: भारत में कृषि सुरक्षा की नई दिशा | UPSC करेंट अफेयर्स 7 जनवरी 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: पर्यावरण, कृषि | GS-2: शासन (नीतियां और हस्तक्षेप)
समाचार में क्यों:
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का मसौदा जारी किया है, जो पुराने कीट अधिनियम, 1968 को प्रतिस्थापित करेगा।
मुख्य प्रावधान:
- नया ढांचा:
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड (Central Pesticides Board) की स्थापना का प्रस्ताव, जो पंजीकरण, लाइसेंसिंग और जोखिम मूल्यांकन का प्रमुख निकाय होगा। - डेटा संरक्षण:
कंपनियों को पंजीकरण के दौरान जमा डेटा पर 5 वर्षों तक विशेष अधिकार प्रदान किए जाएंगे। - किसानों को मुआवजा:
नकली या घटिया कीटनाशकों से हुए नुकसान पर किसानों को मुआवजा देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। - जोखिम-आधारित दृष्टिकोण:
मानव, पशु और पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर कीटनाशकों का उपयोग नियंत्रित किया जाएगा। - निर्यात/आयात नियंत्रण:
उत्पादन, बिक्री, और वितरण पर सख्त नियंत्रण। - बैन और प्रतिबंध शक्तियां:
सरकार को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति होगी। - जैव-कीटनाशकों को प्रोत्साहन:
टिकाऊ कृषि के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा। - दंड प्रावधान:
नकली या बिना पंजीकरण के कीटनाशक बेचने पर कड़ी सजा।
प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न:
निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
- यह विधेयक कीट अधिनियम, 1968 को प्रतिस्थापित करेगा।
- इसमें किसानों के लिए मुआवजे की व्यवस्था है।
- इसमें जैविक कीटनाशकों के लिए अलग प्राधिकरण बनाया गया है।
उत्तर: (c) 1 और 2 केवल
मुख्य परीक्षा प्रश्न:
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 के प्रमुख प्रावधानों का मूल्यांकन करें और बताएं कि यह कृषि उत्पादकता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन के बीच कैसे संतुलन स्थापित कर सकता है।
🌱 हरित क्रांति का ग्रे क्षेत्र: टिकाऊ कृषि और किसान कल्याण | UPSC करेंट अफेयर्स 7 जनवरी 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: कृषि, पर्यावरण; GS-2: शासन
मुख्य बिंदु:
- मौजूदा ढांचा:
- कीट अधिनियम 1968 – कीटनाशकों का पंजीकरण और नियंत्रण।
- उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 – गुणवत्ता और मूल्य निर्धारण।
- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) – मानकीकरण।
- समस्याएं:
- अत्यधिक कीटनाशक उपयोग से मिट्टी और जल प्रदूषण।
- किसानों पर आर्थिक बोझ और नकली उत्पादों का प्रसार।
- निरीक्षण तंत्र की कमी।
- जानकारी का अभाव – सुरक्षित और वैकल्पिक कृषि पद्धतियों पर जागरूकता की कमी।
- सरकारी योजनाएं:
- परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)
- भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP)
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
- नीम-लेपित यूरिया
- एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM)
- ड्रोन उपयोग – सटीक कीटनाशक छिड़काव के लिए
🌳 निजी वनीकरण नीति: पट्टे पर भूमि से हरियाली की दिशा में | UPSC करेंट अफेयर्स 7 जनवरी 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: पर्यावरण, जैवविविधता, वन नीति
मुख्य बिंदु:
- निजी संस्थाओं को पट्टे पर वन भूमि पर पौधारोपण की अनुमति।
- लक्ष्य: वन आच्छादन बढ़ाना और कार्बन अवशोषण क्षमता बढ़ाना।
- यह भारत की पेरिस समझौता प्रतिबद्धता के अनुरूप है (2030 तक 2.5–3 अरब टन CO₂ अवशोषण)।
- राष्ट्रीय वन नीति 1988 का लक्ष्य – 33% भूमि क्षेत्र वनाच्छादित।
- चिंताएं: स्थानीय समुदायों के अधिकार, मोनोकल्चर खतरे, और नियामक निगरानी की कमी।
🌍 निजी क्षेत्र की हरित पहल: सतत विकास की दिशा में
- ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (2023) – स्वैच्छिक पर्यावरणीय कार्यों को ट्रेडेबल क्रेडिट्स के माध्यम से प्रोत्साहन।
- कार्बन मार्केट्स – निजी निवेश को आकर्षित करने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन।
- CSR और PPP मॉडल – हरित बुनियादी ढांचे के विकास में निजी निवेश।
🧩 निष्कर्ष | UPSC करेंट अफेयर्स 7 जनवरी 2026
7 जनवरी 2026 के UPSC करेंट अफेयर्स में भारत की नीतिगत प्राथमिकताओं की झलक मिलती है —
जहां कृषि सुधार, पर्यावरण संरक्षण और भागीदारी आधारित शासन को समान रूप से महत्व दिया जा रहा है।
भारत का भविष्य अब हरित, समावेशी और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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