UPSC करेंट अफेयर्स 12 जनवरी 2026: इसरो PSLV-C62, न्यायिक नियुक्तियां और ED की शक्तियां | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
UPSC करेंट अफेयर्स 12 जनवरी 2026: इसरो के PSLV-C62/EOS-N1 मिशन का विश्लेषण, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के मुद्दे, भारत-जर्मनी/अमेरिका संबंध, सेबी-एनएसई आईपीओ (SEBI-NSE IPO), और ED का PMLA जनादेश। UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
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1. इसरो का PSLV-C62 मिशन: चुनौतियों के बीच सफलता | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (अंतरिक्ष अन्वेषण, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण)
चर्चा में क्यों? भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने PSLV-C62 मिशन के साथ अपने 2026 के कैलेंडर की शुरुआत की। तीसरे चरण (Third stage) के दौरान उड़ान पथ में विचलन (deviation) की खबरों के बावजूद, मिशन ने सफलतापूर्वक EOS-N1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइटको कक्षा में स्थापित किया।
मुख्य विश्लेषण (Key Analysis):
- मिशन अवलोकन: यह 2026 के लिए इसरो का उद्घाटन प्रक्षेपण था, जिसमें इसके सबसे भरोसेमंद वाहन, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) का उपयोग किया गया। PSLV तीसरी पीढ़ी का लॉन्च व्हीकल है जो अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है।
- पेलोड (Payload):
- प्राथमिक: EOS-N1, एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट।
- द्वितीयक: कई सह-यात्री उपग्रह।
- विसंगति (Anomaly): रॉकेट के प्रक्षेपवक्र (trajectory) के तीसरे चरण के दौरान एक विचलन की सूचना मिली थी। हालांकि, मिशन ने अंततः उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने का अपना प्राथमिक उद्देश्य हासिल कर लिया।
- EOS-N1 का महत्व:
- आपदा प्रबंधन: बाढ़ और चक्रवातों की रीयल-टाइम निगरानी।
- कृषि: फसल स्वास्थ्य की निगरानी और उपज का अनुमान।
- शहरी नियोजन: शहरी फैलाव और बुनियादी ढांचे की मैपिंग।
- पर्यावरण: वन आवरण और जल निकायों की निगरानी।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास (Prelims Practice): इसरो के PSLV-C62 मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह वर्ष 2026 के लिए इसरो का पहला अंतरिक्ष मिशन था।
- लॉन्च किया गया प्राथमिक उपग्रह, EOS-N1, एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।
- मिशन के प्रारंभिक प्रक्षेपण चरण (initial launch phase) के दौरान उड़ान पथ में विसंगति की सूचना मिली थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3 उत्तर: (a) (विसंगति तीसरे चरण में थी, प्रारंभिक चरण में नहीं).
मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Question): “अपने तीसरे चरण के दौरान उड़ान पथ में विचलन की रिपोर्ट के बावजूद, इसरो के PSLV-C62 मिशन ने EOS-N1 उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। भारत के लिए इस तरह के मिशनों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें और भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम की विश्वसनीयता और भविष्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक चुनौतियों और संस्थागत सुरक्षा उपायों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।”
2. न्यायिक नियुक्तियां और संघीय तनाव | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-2: राजव्यवस्था और संविधान (न्यायपालिका, केंद्र-राज्य संबंध)
चर्चा में क्यों? जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका ने संघवाद (federalism) और शक्तियों के पृथक्करण पर बहस फिर से छेड़ दी है।
मुख्य विश्लेषण (Key Analysis):
- सुप्रीम कोर्ट नियुक्तियां:
- प्रक्रिया: यह अनुच्छेद 124(2) और कॉलेजियम प्रणाली (थ्री जजेस केस के माध्यम से विकसित) द्वारा शासित है।
- कॉलेजियम: इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) + 4 वरिष्ठतम SC जज शामिल होते हैं। उनकी सिफारिश राष्ट्रपति (कार्यपालिका) पर बाध्यकारी होती है, हालांकि कार्यपालिका एक बार पुनर्विचार के लिए कह सकती है।
- संदर्भ: जस्टिस मिश्रा को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से पदोन्नत किया गया था।
- संघीय घर्षण (ED बनाम राज्य):
- घटना: ED ने पश्चिम बंगाल राज्य मशीनरी द्वारा उसके छापों (PMLA/FEMA जांच से जुड़े) में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की।
- संवैधानिक कोण: यह केंद्रीय एजेंसी (ED) के संघीय अपराधों (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच करने के अधिकार क्षेत्र और “सार्वजनिक व्यवस्था” और “पुलिस” (राज्य सूची के विषय) पर राज्य के नियंत्रण के बीच संघर्ष को उजागर करता है।
- सुप्रीम कोर्ट की भूमिका: संघीय मध्यस्थ के रूप में, सुप्रीम कोर्ट को जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और राज्यों के संघीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास (Prelims Practice): भारत में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा आवश्यक न्यायाधीशों के परामर्श के बाद की जाती है।
- अन्य SC न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा CJI के परामर्श के बाद की जाती है।
- नामों की सिफारिश करने के लिए कॉलेजियम प्रणाली प्राथमिक तंत्र है।
सही उत्तर चुनें: (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3 उत्तर: (d)
3. भारत की कूटनीतिक दिशा: अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध (द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह)
चर्चा में क्यों? हालिया कूटनीतिक गतिविधियों में एक नए अमेरिकी दूत का बयान, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ एक बैठक (परोक्ष संदर्भ: “जर्मन चांसलर के साथ उच्च-स्तरीय बैठक”), और अफगानिस्तान से तालिबान द्वारा नियुक्त दूत की नियुक्ति शामिल है।
मुख्य विश्लेषण (Key Analysis):
- भारत-अमेरिका: रक्षा और महत्वपूर्ण तकनीक (iCET) पर ध्यान केंद्रित। यह साझेदारी एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक में निहित है।
- भारत-जर्मनी:
- व्यापार: जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
- हरित साझेदारी: स्वच्छ ऊर्जा और कुशल श्रम की गतिशीलता पर ध्यान।
- नेतृत्व: चांसलर मर्ज़ के नेतृत्व में जर्मन नेतृत्व के साथ जुड़ाव मजबूती से जारी है।
- भारत-अफगानिस्तान:
- बदलाव: तालिबान द्वारा नियुक्त दूत को स्वीकार करना “गैर-जुड़ाव” से “कार्यात्मक जुड़ाव” (functional engagement) की ओर एक व्यावहारिक बदलाव का प्रतीक है।
- प्राथमिकताएं: मानवीय सहायता (गेहूं, दवाएं) और यह सुनिश्चित करना कि अफगान भूमि का उपयोग आतंक के लिए न हो।
- रणनीति: भारत बहु-संरेखण (Multi-alignment) का पालन कर रहा है—पश्चिम (यूएस/जर्मनी) को संतुलित करते हुए अपने पड़ोस (अफगानिस्तान) में व्यावहारिक वास्तविकताओं को शामिल करना।
मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Question): “किस हद तक भारत की वर्तमान विदेश नीति एक ‘संतुलन कार्य’ (balancing act) है—प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों को गहरा करना जबकि अस्थिर पड़ोस की वास्तविकताओं का प्रबंधन करना? संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान के साथ भारत की हालिया बातचीत के उदाहरणों का उपयोग करते हुए आलोचनात्मक विश्लेषण करें।”
4. सेबी और एनएसई आईपीओ गाथा (SEBI & NSE IPO Saga) | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: भारतीय अर्थव्यवस्था (वित्तीय बाजार, नियामक)
चर्चा में क्यों? सेबी (SEBI) कथित तौर पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को मंजूरी देने के लिए नियामक बाधाओं को हल कर रहा है।
मुख्य विश्लेषण (Key Analysis):
- देरी: को-लोकेशन घोटाले और एनएसई में शासन की खामियों के कारण आईपीओ रुका हुआ था।
- सेबी की भूमिका: नियामक के रूप में, सेबी को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक्सचेंज लिस्टिंग से पहले “फिट और प्रॉपर” हो। एक स्टॉक एक्सचेंज एक मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन (MII) है; इसकी विफलता प्रणालीगत जोखिम पैदा करती है।
- महत्व: लिस्टिंग से एनएसई में पारदर्शिता में सुधार होगा (क्योंकि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए सख्त प्रकटीकरण मानदंड हैं) और निवेशकों को भारत की वित्तीय विकास गाथा का हिस्सा बनने की अनुमति मिलेगी।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास (Prelims Practice): भारत में स्टॉक एक्सचेंजों और आईपीओ के लिए प्राथमिक नियामक निकाय कौन सा है? (a) RBI (b) MCA (c) SEBI (d) NCLT उत्तर: (c) SEBI
5. प्रवर्तन निदेशालय (ED): शक्तियां और चुनौतियां | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: मनी लॉन्ड्रिंग और GS-2: वैधानिक निकाय
चर्चा में क्यों? कोलकाता कोयला खनन जांच में ED के छापों ने एजेंसी के बढ़ते दायरे को सुर्खियों में ला दिया है।
मुख्य विश्लेषण (Key Analysis):
- अधिदेश (Mandate):
- FEMA, 1999 (सिविल): विदेशी मुद्रा का विनियमन।
- PMLA, 2002 (आपराधिक): मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना और “अपराध की आय” (proceeds of crime) को जब्त करना।
- FEOA, 2018: भगोड़े आर्थिक अपराधियों से निपटना।
- मूल मंत्रालय: राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय।
- शक्तियां:
- कुर्की (Attachment): उन संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क कर सकता है जिनके बारे में माना जाता है कि वे काले धन से खरीदी गई हैं।
- गिरफ्तारी: PMLA के तहत कड़ी जमानत शर्तें (जमानत के लिए आरोपी पर निर्दोष साबित होने का बोझ होता है)।
- चिंताएं: राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप और “संघीय अतिरेक” (federal overreach) की बहस (जैसा कि पश्चिम बंगाल मामले में देखा गया)।
प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास (Prelims Practice): ED के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:
- यह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत कार्य करता है। (गलत – वित्त मंत्रालय)
- यह FEMA को लागू करता है। (सही)
- यह PMLA के तहत संपत्तियों को कुर्क कर सकता है। (सही)
सही उत्तर: (b) केवल 2 और 3
6. भारत की रूसी तेल रणनीति: राजकोषीय प्रभाव | UPSC Current Affairs in Hindi 12 Jan 2026
सिलेबस मैपिंग: GS-3: ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों? विशेषज्ञ रियायती रूसी कच्चे तेल के आयात में संभावित कमी के प्रभाव पर बहस कर रहे हैं।
मुख्य विश्लेषण (Key Analysis):
- बदलाव: 2022 के बाद, रूस पारंपरिक मध्य पूर्व भागीदारों की जगह लेते हुए, भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बन गया (<2% से >30% तक)।
- लाभ:
- चालू खाता घाटा (CAD): कम तेल बिलों ने CAD को प्रबंधित करने में मदद की।
- मुद्रास्फीति: वैश्विक अस्थिरता के बावजूद सस्ते इनपुट ने घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा।
- कमी के जोखिम:
- राजकोषीय घाटा: महंगे विकल्पों (सऊदी/अमेरिका) से खरीदारी करने पर आयात बिल बढ़ेगा।
- रुपया: डॉलर के अधिक बहिर्वाह (outflow) से भारतीय रुपया (INR) कमजोर हो सकता है।
- निष्कर्ष: भारत को अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” (रूस से खरीदारी) को स्रोतों में विविधता लाने के साथ संतुलित करना चाहिए ताकि अत्यधिक निर्भरता को रोका जा सके।
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